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विस्तृत अवलोकन - देशनोक एवं राजकीय महाविद्यालय

देशनोक कस्बा

इतिहास, आस्था और आधुनिक शिक्षा की गौरवशाली भूमि

देशनोक: इतिहास, वास्तुकला और आस्था

ऐतिहासिक पृष्ठभूमि: बीकानेर शहर से लगभग 30 किमी दक्षिण में स्थित देशनोक राजस्थान के प्रमुख धार्मिक स्थलों में से एक है। इस कस्बे की नींव वैशाख सुदी द्वितीया, संवत 1476 (1419 ईस्वी) में स्वयं भगवती करणी माता द्वारा रखी गई थी। ऐसा माना जाता है कि शुरुआत में इस जगह का नाम 'देशओट' (जिसका अर्थ है ओट या ढाल) रखने का विचार था, लेकिन माता ने इसका नाम 'देशनाक' (भूमि की नाक या गौरव) रखा, जो समय के साथ 'देशनोक' बन गया। देशनोक का संबंध राव बीका (बीकानेर के संस्थापक) से भी है, जिन्हें करणी माता ने अपना आशीर्वाद दिया था।

विश्व प्रसिद्ध करणी माता मंदिर: देशनोक की सबसे बड़ी पहचान यहाँ स्थित 600 वर्ष पुराना करणी माता का मंदिर है। यह मंदिर विश्वभर में 'चूहों वाले मंदिर' के नाम से विख्यात है। मंदिर परिसर में 20,000 से अधिक काले चूहे स्वतंत्र रूप से विचरण करते हैं, जिन्हें स्थानीय भाषा में 'काबा' कहा जाता है। भक्तों का मानना है कि ये काबा माता के पूर्वज और चारण जाति के लोग हैं, जो मृत्यु के बाद चूहों के रूप में पुनर्जन्म लेते हैं। इन काले चूहों के बीच अगर किसी को सफ़ेद चूहा (White Rat) दिख जाए, तो उसे अत्यधिक शुभ और माता का साक्षात् दर्शन माना जाता है।

भव्य वास्तुकला: मंदिर की वास्तुकला राजपूताना और मुग़ल शैली का अनूठा मिश्रण है। मंदिर का मुख्य द्वार संगमरमर की बारीक और खूबसूरत नक्काशी से सजा है। इसके ठोस चांदी के विशाल किवाड़ (Silver Doors) बीकानेर के तत्कालीन महाराजा गंगा सिंह द्वारा भेंट किए गए थे, जो इसकी भव्यता में चार चाँद लगाते हैं।

करणी माता मंदिर का मुख्य द्वार मंदिर में काबा (पवित्र चूहे)

🙏 धार्मिक मेले और उत्सव

देशनोक में वर्ष में दो बार—चैत्र नवरात्र और आश्विन नवरात्र के दौरान विशाल मेलों का आयोजन होता है। इन मेलों में राजस्थान ही नहीं बल्कि पूरे भारत से लाखों श्रद्धालु पैदल यात्रा कर माता के दर्शन हेतु आते हैं।

🏺 स्थानीय कला एवं शिल्प

आध्यात्मिक महत्व के अलावा देशनोक अपनी पारंपरिक राजस्थानी मोजड़ियों (चमड़े की जूतियाँ) और मिट्टी के हस्तशिल्प के लिए भी प्रसिद्ध है। यहाँ के कारीगर पीढ़ियों से इस कला को जीवित रखे हुए हैं।

राजकीय महाविद्यालय देशनोक: शिक्षा की नई क्रांति

स्थापना एवं उद्देश्य: देशनोक और इसके आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों के युवाओं—विशेषकर बालिकाओं को उच्च शिक्षा के लिए बीकानेर शहर न जाना पड़े, इस उद्देश्य की पूर्ति हेतु वर्ष 2020-21 में 'राजकीय महाविद्यालय देशनोक' की स्थापना की गई। महाराजा गंगा सिंह विश्वविद्यालय (MGSU) से संबद्ध यह महाविद्यालय बहुत ही कम समय में अकादमिक उत्कृष्टता का केंद्र बन गया है।

शैक्षणिक विस्तार: प्रारंभ में कला संकाय से शुरुआत करने वाले इस महाविद्यालय ने अब अपने पंख पसार लिए हैं। वर्तमान में यहाँ कला (B.A.), वाणिज्य (B.Com.) और विज्ञान (B.Sc. Biology & Maths) संकायों में स्नातक की शिक्षा दी जा रही है। साथ ही, उच्च शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए यहाँ एम.ए. भूगोल (M.A. Geography) में स्नातकोत्तर (PG) कक्षाएं भी सुचारू रूप से चल रही हैं।

महाविद्यालय के प्रमुख अभियान एवं सुविधाएँ

🥋 रानी लक्ष्मी बाई आत्मरक्षा केंद्र

बालिकाओं को शारीरिक और मानसिक रूप से सशक्त बनाने के लिए कॉलेज में 1 माह का निःशुल्क आत्मरक्षा प्रशिक्षण (Self Defense Training) आयोजित किया जाता है। इससे छात्राओं में आत्मविश्वास और सुरक्षा की भावना विकसित हो रही है।

🚫 'नई किरण' नशा मुक्ति अभियान

युवा पीढ़ी को नशे की लत से बचाने के लिए महाविद्यालय द्वारा 'नई किरण' जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है। इसके अंतर्गत रैलियां, संगोष्ठियां और पोस्टर प्रतियोगिताएं आयोजित की जाती हैं।

🗳️ मतदाता जागरूकता (SVEEP)

लोकतंत्र में युवाओं की भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए विधानसभा चुनाव 2026 को लक्ष्य करते हुए कॉलेज में वोटर रजिस्ट्रेशन क्लस्टर कैंप लगाए जा रहे हैं, ताकि 18 वर्ष पूर्ण कर चुके सभी छात्रों का नाम मतदाता सूची में जुड़ सके।

उपलब्ध पाठ्यक्रम:

B.A. (Arts)
B.Com. (Commerce)
B.Sc. (Maths)
B.Sc. (Biology)
M.A. Geography (PG)

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